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Delhi PG Building Collapse: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरी, 7 की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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Delhi PG Building Collapse: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरी, 7 की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला PG इमारत के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत और 5 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इमारत में मुख्य रूप से छात्र रह रहे थे। घटना के बाद मौके पर पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत टीमों ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया। करीब 27 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अभियान समाप्त किया गया। 

यह हादसा दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुआ, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में छात्र PG और किराये के कमरों में रहते हैं। हादसे के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भी दहशत फैल गई।

मरम्मत के दौरान ढही इमारत

रिपोर्टों के मुताबिक, जिस इमारत में PG चल रहा था, उसमें मरम्मत और निर्माण से संबंधित काम चल रहा था। पुलिस के अनुसार इमारत करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी थी और बेसमेंट में काम किया जा रहा था। 

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी शुरुआती जानकारी के आधार पर बताया था कि बेसमेंट में खुदाई के दौरान एक पिलर खिसकने के बाद इमारत का ढांचा प्रभावित हुआ और पूरी इमारत गिर गई। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। 

स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि लगातार बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा था। पानी और निर्माण कार्य ने इमारत की नींव या संरचना को प्रभावित किया या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। 

मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए चला अभियान

इमारत गिरते ही आसपास अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के साथ पुलिस, दमकल विभाग और राहत दल मौके पर पहुंचे।

मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया। रिपोर्टों के अनुसार कुल 12 लोगों को मलबे से निकाला गया, जिनमें 7 की मौत हो गई और 5 घायल हुए। सोमवार शाम करीब 5 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त हुआ। 

बचाव अभियान के दौरान मलबे को सावधानी से हटाया गया, क्योंकि किसी जीवित व्यक्ति के दबे होने की संभावना बनी हुई थी।

Delhi PG Building Collapse: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरी, 7 की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सात लोगों की मौत से इलाके में मातम

हादसे में सात लोगों की जान चली गई। मृतकों में छात्रों और अन्य लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

घटना के बाद मृतकों के परिवारों में शोक की लहर है। दिल्ली प्रशासन की ओर से हादसे की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात कही गई है।

यह घटना एक बार फिर उन हजारों छात्रों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है जो दिल्ली में पढ़ाई के दौरान निजी PG और किराये के कमरों में रहते हैं।

PG इमारतों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाका है। यहां बड़ी संख्या में निजी हॉस्टल और PG संचालित होते हैं।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऐसी इमारतों की नियमित संरचनात्मक जांच होती है?

Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के बाद अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण, बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर कथित तौर पर बिना अनुमति किए जा रहे काम और आपातकालीन निकास जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे हैं। 

अगर किसी पुरानी इमारत में कई अतिरिक्त मंजिलें बना दी जाएं और साथ ही बेसमेंट में निर्माण कार्य किया जाए, तो उसकी संरचनात्मक सुरक्षा की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

इमारत कितनी पुरानी थी?

रिपोर्टों के अनुसार हादसे में ढही इमारत लगभग 40 से 50 वर्ष पुरानी थी। यह पांच मंजिला संरचना थी और इसमें छात्र PG के रूप में रह रहे थे।

पुरानी इमारतों में समय के साथ संरचनात्मक कमजोरी, पानी का रिसाव और रखरखाव की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर मरम्मत या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले विशेषज्ञों से संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कराना महत्वपूर्ण होता है।

मालिक परिवार के तीन लोग गिरफ्तार

हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक और प्रबंधन से जुड़े परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया।

India Today की रिपोर्ट के अनुसार हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि संपत्ति उर्मिला के नाम पर थी, जबकि इसका संचालन हरिराम और महेश करते थे। 

मामले में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के बयान भी जांच का हिस्सा हैं।

हालांकि इमारत गिरने की सटीक तकनीकी वजह अभी जांच का विषय है। इसलिए किसी एक कारण को अंतिम कारण मानना जल्दबाजी होगी।

MCD अधिकारियों पर भी कार्रवाई

हादसे के बाद नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली सरकार ने MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। 

इस कार्रवाई के बाद दिल्ली में अवैध निर्माण और इमारतों की निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस और तेज हो गई है।

आसपास की इमारतों की भी जांच

एक इमारत गिरने के बाद आसपास की दूसरी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

MCD ने हादसे के बाद अवैध रूप से बनी ऊंची इमारतों पर कार्रवाई और सीलिंग की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। 

ऐसे कदमों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं आसपास भी ऐसी इमारतें तो नहीं हैं जिनमें बिना अनुमति अतिरिक्त निर्माण या खतरनाक बदलाव किए गए हैं।

Delhi PG Building Collapse: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरी, 7 की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

हादसे का मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक भी पहुंच गया है। कोर्ट ने घटना को गंभीरता से लेते हुए MCD की उच्चस्तरीय जांच और PG accommodations की सुरक्षा से जुड़े ऑडिट पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगा है। 

इससे साफ है कि मामला सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं रह गया है। अब राजधानी में छात्रों के लिए संचालित निजी PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

दिल्ली में देशभर से हजारों विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। हर छात्र को कॉलेज या विश्वविद्यालय का हॉस्टल उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में निजी PG उनके लिए सबसे सामान्य विकल्पों में से एक है।

लेकिन अगर निजी PG इमारतों में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच नहीं होती, तो छात्रों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

इस हादसे ने यह सवाल सामने रखा है कि PG में रहने वाले छात्रों के लिए भवन की मजबूती, आपातकालीन निकास, अग्नि सुरक्षा और निर्माण नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।

आगे क्या होगा?

अब पुलिस और प्रशासन की जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इमारत किस स्थिति में थी, उसमें किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था और क्या जरूरी अनुमतियां ली गई थीं।

साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित विभागों की ओर से इमारत का निरीक्षण कब और किस तरह किया गया था।

जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।

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